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1. सेब का सिरका
सामगà¥à¤°à¥€ :
2 चमà¥à¤®à¤š सेब का सिरका
1 गिलास गरà¥à¤® पानी
पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— की विधि :
सेब के सिरके को पानी में डालकर अचà¥à¤›à¥€ तरह मिकà¥à¤¸ करें।
फिर इस पानी को पी जाà¤à¤‚। संà¤à¤µ हो, तो à¤à¥‹à¤œà¤¨ से पहले इसे पिà¤à¤‚।
सेब के सिरके को थोड़े-से नारियल तेल में मिकà¥à¤¸ करके पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ जगह पर लगा à¤à¥€ सकते हैं।
कितनी बार करें :
सेब के सिरके à¤à¤‚टीइंफà¥à¤²à¥‡à¤®à¥‡à¤Ÿà¤°à¥€ गà¥à¤£à¥‹à¤‚ से à¤à¤°à¤¾ होता है, इसलिठइसे मांसपेशियों के दरà¥à¤¦ और अरà¥à¤¥à¤°à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ से राहत देने में सहायक माना जा सकता है। इस गà¥à¤£ के कारण ही यह जोड़ों में दरà¥à¤¦ व घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ की सूजन को कम कर सकता है । घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ के दरà¥à¤¦ का इलाज करने के लिठइस विधि को अपना सकते हैं।
2. हलà¥à¤¦à¥€
à¤à¤• चमà¥à¤®à¤š हलà¥à¤¦à¥€
à¤à¤• गिलास नारियल/बादाम का दूध
पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— की विधि :
सबसे पहले दूध को गरà¥à¤® कर लें।
फिर इसमें हलà¥à¤¦à¥€ को डालकर मिकà¥à¤¸ कर दें।
अब इस दूध को हलà¥à¤•ा गरà¥à¤® होने पर पिà¤à¤‚।
कितनी बार करें :
घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ के दरà¥à¤¦ का उपाय के रूप में रोज दो बार यह दूध पी सकते हैं।
कैसे है फायदेमंद :
घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ के दरà¥à¤¦ का आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¿à¤• इलाज हलà¥à¤¦à¥€ की मदद से किया जा सकता है। हलà¥à¤¦à¥€ में करकà¥à¤¯à¥‚मिन नामक पà¥à¤°à¤®à¥à¤– ततà¥à¤µ पाया जाता है। यह à¤à¤‚टीइंफà¥à¤²à¥‡à¤®à¥‡à¤Ÿà¤°à¥€ की तरह काम करता है। कà¥à¤› वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• शोधों में पाया गया है कि हलà¥à¤¦à¥€ के पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— से जोड़ों के दरà¥à¤¦ व घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ की सूजन को कम किया जा सकता है । इसलिà¤, हलà¥à¤¦à¥€ के जरिठघà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ के दरà¥à¤¦ और घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ पर सूजन का इलाज किया जा सकता है।
3. अदरक
सामगà¥à¤°à¥€ :
अदरक का à¤à¤• इंच टà¥à¤•ड़ा
à¤à¤• कप पानी
साफ कपड़ा
पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— की विधि :
अदरक को पानी में डालकर करीब पांच मिनट तक उबालें।
इसके बाद पानी को छानकर थोड़ा ठंडा होने के लिठरख दें।
फिर कपड़े को इस पानी में डालकर निचोड़ लें और पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ जगह पर रखें।
अब शरीर के पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हिसà¥à¤¸à¥‡ को इस कपड़े से लपेट दें।
इस पानी को चाय की तरह पी à¤à¥€ सकते हैं।
कितनी बार करें :
बेहतर परिणाम के लिठइसे दिन में कई बार किया जा सकता है।
कैसे है फायदेमंद :
अगर किसी को ऑसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤†à¤°à¥à¤¥à¤°à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ के कारण घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ में दरà¥à¤¦ हो रहा है, तो इससे निपटने के लिठअदरक का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² कर सकते हैं । à¤à¤¨à¤¸à¥€à¤¬à¥€à¤†à¤ˆ (नेशनल सेंटर ऑफ बायोटेकà¥à¤¨à¥‹à¤²à¥‰à¤œà¥€ इनफारà¥à¤®à¥‡à¤¶à¤¨) के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, अदरक में जिंजेरॉल पाया जाता है, जो à¤à¤‚टी-इंफà¥à¤²à¥‡à¤®à¥‡à¤Ÿà¤°à¥€ की तरह काम कर सकता है। यह घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ के दरà¥à¤¦ का उपाय हो सकता है। साथ ही इसे à¤à¤¨à¤¾à¤²à¥à¤œà¥‡à¤¸à¤¿à¤• यानी दरà¥à¤¦ को कम करने वाली जड़ी-बूटी à¤à¥€ माना गया है । इसलिà¤, à¤à¤¸à¤¾ कहा जाता है कि घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ के दरà¥à¤¦ का इलाज करने के लिठअदरक का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— कर सकते हैं।
4. लाल मिरà¥à¤š
सामगà¥à¤°à¥€ :
तीन चमà¥à¤®à¤š लाल मिरà¥à¤š
à¤à¤• कप जैतून का तेल
आधा कप बीवैकà¥à¤¸ का चूरà¥à¤£
à¤à¤• डबल बाॅयलर
à¤à¤• जार
पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— की विधि :
लाल मिरà¥à¤š को जैतूल के तेल में मिकà¥à¤¸ कर दें।
इसे डबल बॉयलर में डालकर मधà¥à¤¯à¤® आंच पर करीब 10 मिनट तक उबालें।
अब इसमें बीवैकà¥à¤¸ को डालकर लगातार हिलाते रहें।
बीवैकà¥à¤¸ के पूरी तरह घà¥à¤²à¤¨à¥‡ और मिशà¥à¤°à¤£ के मà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤® होने तक इसे हिलाते रहें।
इसके बाद मिशà¥à¤°à¤£ को करीब 10 मिनट के लिठफà¥à¤°à¤¿à¤œ में रख दें और बाद में बाहर निकालकर फिर से फेंटें।
अब इसे फिर से 15 मिनट के लिठठंडा होने दें और à¤à¤• बार फिर अचà¥à¤›à¥€ तरह फेंटें।
आपका मिशà¥à¤°à¤£ तैयार है। अब इसे जार में डालकर ढक दें और फà¥à¤°à¤¿à¤œ में रख दें।
अब जब à¤à¥€ जरूरत हो, इसका इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करें।
कितनी बार करें :
घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ के दरà¥à¤¦ का उपाय चाहते हैं, तो इस पेसà¥à¤Ÿ को दिनà¤à¤° में कई बार पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ जगह पर लगा सकते हैं।
कैसे है फायदेमंद :
घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ के दरà¥à¤¦ का उपाय के रूप में लाल मिरà¥à¤š à¤à¥€ कारगर हो सकती है। लाल मिरà¥à¤š में कैपà¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤¸à¤¿à¤¨ पाया जाता है, जो घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ के दरà¥à¤¦ को ठीक करने का काम कर सकता है। कैपà¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤¸à¤¿à¤¨ में à¤à¤‚टी-इंफà¥à¤²à¥‡à¤®à¥‡à¤Ÿà¤°à¥€ व à¤à¤¨à¤¾à¤²à¥à¤œà¥‡à¤¸à¤¿à¤• (दरà¥à¤¦ कम करने वाले) गà¥à¤£ पाठजाते हैं, जो पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक रूप से दरà¥à¤¦ निवारक यानी घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ के दरà¥à¤¦ की दवा का काम कर सकते हैं । इसलिà¤, घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ के दरà¥à¤¦ का इलाज लाल मिरà¥à¤š से किया जा सकता है।
5. मेथी दाने
सामगà¥à¤°à¥€ :
दो चमà¥à¤®à¤š मेथी दाने
à¤à¤• गिलास पानी
पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— की विधि :
पानी में मेथी दाने डालकर रातà¤à¤° के लिठछोड़ दें।
अगली सà¥à¤¬à¤¹ पानी को छानकर पी लें।
पानी के साथ मेथी दानों को पीसकर पेसà¥à¤Ÿ à¤à¥€ बना सकते है। फिर इस पेसà¥à¤Ÿ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ जगह पर लगाà¤à¤‚।
कितनी बार करें :
रोज à¤à¤• बार इस पेसà¥à¤Ÿ का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² जरूर करें।
कैसे है फायदेमंद :
घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ के दरà¥à¤¦ का उपचार मेथी से संà¤à¤µ हो सकता है। मेथी दानों में लिनोलेनिक और लिनोलिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ पाठजाते हैं, जो à¤à¤‚टी-इंफà¥à¤²à¥‡à¤®à¥‡à¤Ÿà¤°à¥€ और à¤à¤‚टी अरà¥à¤¥à¤°à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤• पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ डाल सकते हैं और घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ के दरà¥à¤¦ से राहत दे सकते हैं। इसके इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² से घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ की सूजन को कम किया जा सकता है। मेथी दाने के इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² से घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ के दरà¥à¤¦ का इलाज किया जा सकता है।
6. सेंधा नमक
सामगà¥à¤°à¥€ :
à¤à¤• कप सेंधा नमक
पानी आवशà¥à¤¯à¤•तानà¥à¤¸à¤¾à¤°
पà¥à¤¦à¥€à¤¨à¥‡ के तेल की कà¥à¤› बूंदें
पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— की विधि :
बाथ टब में पानी à¤à¤°à¤•र उसमें सेंधा नमक मिकà¥à¤¸ कर दें।
इसमें पà¥à¤¦à¥€à¤¨à¥‡ के तेल की कà¥à¤› बूंदें à¤à¥€ डाल सकते हैं।
अब इस पानी में करीब 20-30 मिनट तक बैठें।
कितनी बार करें :
पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ à¤à¤• बार à¤à¤¸à¤¾ किया जा सकता है।
कैसे है फायदेमंद :
सेंधा नमक में मैगà¥à¤¨à¥€à¤¶à¤¿à¤¯à¤® और सलà¥à¤«à¥‡à¤Ÿ होता है, जो दरà¥à¤¦ निवारक की तरह काम कर सकता है। खासकर, मैगà¥à¤¨à¥€à¤¶à¤¿à¤¯à¤® सूजन को कम कर सकता है। यही कारण है कि घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ में दरà¥à¤¦ होने पर सेंधा नमक का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जा सकता है। यह तरीका न सिरà¥à¤« ससà¥à¤¤à¤¾ है, बलà¥à¤•ि आसान à¤à¥€ है सेंधा नमक से घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ के दरà¥à¤¦ का इलाज किया जा सकता है।
7. नींबू
सामगà¥à¤°à¥€ :
à¤à¤• नींबू
à¤à¤• चमà¥à¤®à¤š तिल का तेल
पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— की विधि :
नींबू का रस निकालकर तिल के तेल में मिकà¥à¤¸ कर दें।
अब इस मिशà¥à¤°à¤£ को घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ पर लगाà¤à¤‚ और 30-40 मिनट के लिठछोड़ दें।
नींबू का जूस पीने से और फायदा हो सकता है।
कितनी बार करें :
इस मिशà¥à¤°à¤£ को पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ तीन-चार बार घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ पर लगा सकते हैं।
दिन में दो बार नींबू पानी का सेवन कर सकते हैं।
कैसे है फायदेमंद :
नींबू में à¤à¤‚टी-इंफà¥à¤²à¥‡à¤®à¥‡à¤Ÿà¤°à¥€ गà¥à¤£ पाठजाते हैं, जो घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ की सूजन और दरà¥à¤¦ को कम कर सकते हैं । वहीं, शरीर में यूरिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ के बॠजाने पर घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ में दरà¥à¤¦ का कारण माने जाने वाले रोग पैदा हो सकते हैं, जैसे गाउट। वहीं, नींबू पानी का सेवन करने से सीरम यूरिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ में कमी आ सकती हैं। इसलिà¤, कहा जा सकता हैं नींबू यूरिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ घटाकर, घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ के दरà¥à¤¦ में राहत दे सकता है।
8. सरसों का तेल
सामगà¥à¤°à¥€ :
सरसों का तेल (आवशà¥à¤¯à¤•तानà¥à¤¸à¤¾à¤°)
पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— की विधि :
सरसों के तेल को अपनी उंगलियों पर लगाकर हलà¥à¤•े-हलà¥à¤•े हाथों से घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ की मालिश करें।
इस तेल में लहसà¥à¤¨ की कलियों को पीसकर मिकà¥à¤¸ कर सकते हैं।
कितनी बार करें :
दिनà¤à¤° में कई बार इस तेल से मालिश कर सकते हैं।
कैसे है फायदेमंद :
घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ पर सरसों का तेल लगाने से दरà¥à¤¦ व सूजन से राहत मिल सकती है । अगर घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ के दरà¥à¤¦ का इलाज घर बैठे करना चाहते हैं, तो सरसों के तेल का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² कर सकते हैं। सरसों का तेल जोड़ों के दरà¥à¤¦ में हलà¥à¤•ी फà¥à¤²à¥à¤•ी राहत दे सकता है और साथ ही यह पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ तà¥à¤µà¤šà¤¾ को मà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤® à¤à¥€ बना सकता है
9. लहसà¥à¤¨
सामगà¥à¤°à¥€ :
50 गà¥à¤°à¤¾à¤® लहसà¥à¤¨
25 गà¥à¤°à¤¾à¤® अजवाइन
10 गà¥à¤°à¤¾à¤® लौंग
200 गà¥à¤°à¤¾à¤® सरसों का तेल
पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— की विधि :
लहसà¥à¤¨, अजवाइन और लौंग को पीस लें।
अब इन सà¤à¥€ सामगà¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को तेल में डालकर जला लें।
जब तेल ठंडा हो जाà¤, तो कांच की बोतल में डालकर रख दें।
अब जब à¤à¥€ जरूरत हो, इससे घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ की मालिश करें।
कितनी बार करें :
इस तेल से दिन में à¤à¤• या दो बार मालिश की जा सकती है।
कैसे है फायदेमंद :
लहसà¥à¤¨ में à¤à¤‚टी-इंफà¥à¤²à¥‡à¤®à¥‡à¤Ÿà¤°à¥€ गà¥à¤£ होते हैं, जो घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ के दरà¥à¤¦ और सूजन को कम करने में मदद कर सकता है। वहीं, à¤à¤• शोध में जिकà¥à¤° मिलता है कि लहसà¥à¤¨ ऑसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤†à¤°à¥à¤¥à¤°à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ से लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ (जैसे जोड़ों में दरà¥à¤¦, अकड़न और सूजन) में सà¥à¤§à¤¾à¤° का काम कर सकता है। अगर घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ के दरà¥à¤¦ का उपाय खोज रहे हैं, तो लहसà¥à¤¨ का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जा सकता है।
10. जैतून का तेल
सामगà¥à¤°à¥€ :
à¤à¤•à¥à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾ वरà¥à¤œà¤¿à¤¨ जैतूल का तेल (आवशà¥à¤¯à¤•तानà¥à¤¸à¤¾à¤°)
पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— की विधि :
जितना तेल चाहिà¤, उतना अपनी उंगलियों पर लगाकर हलà¥à¤•े-हलà¥à¤•े हाथों से मालिश करें।
तेल को लगा रहने दें, ताकि वह अपने आप सà¥à¤•िन में अवशोषित हो जाà¤à¥¤
अगर किसी को इसका चिपचिपापन अचà¥à¤›à¤¾ नहीं लगे, तो करीब 30 मिनट बाद उसे साफ कर दें।
कितनी बार करें : अचà¥à¤›à¥‡ परिणाम के लिठयह तेल दिन में तीन-चार बार लगा सकते हैं।
कैसे है फायदेमंद :
जैतून के तेल में पॉलीफेनॉलà¥à¤¸ जैसे हाइडà¥à¤°à¥‰à¤•à¥à¤¸à¥€à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‹à¤¸à¥‹à¤², टायरोसोल, ओलेओकैंथल और ओलेयूरोपिन जैसे कई बायोलॉजिकल ततà¥à¤µ होते हैं। ये सà¤à¥€ ततà¥à¤µ à¤à¤‚टी-इंफà¥à¤²à¥‡à¤®à¥‡à¤Ÿà¤°à¥€ की तरह घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ के दरà¥à¤¦ से राहत दिलाने में मदद कर सकते हैं (19)। इसलिà¤, घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ के दरà¥à¤¦ का उपाय व घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ में दरà¥à¤¦ का इलाज जैतून के तेल से किया जा सकता है।
11. नारियल तेल
सामगà¥à¤°à¥€ :
à¤à¤•à¥à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾ वरà¥à¤œà¤¿à¤¨ नारियल तेल (आवशà¥à¤¯à¤•तानà¥à¤¸à¤¾à¤°)
पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— की विधि :
उंगलियों पर जरूरत के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° नारियल तेल लगाकर घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ की हलà¥à¤•े हाथों से मालिश करें।
मालिश के बाद इस तेल को अपने आप सूखने दें या फिर 30 मिनट बाद साफ कर दें।
कितनी बार करें :
दिनà¤à¤° में दो से तीन बार मालिश कर सकते हैं।
कैसे है फायदेमंद :
नारियल तेल में à¤à¤‚टी-इंफà¥à¤²à¥‡à¤®à¥‡à¤Ÿà¤°à¥€ और à¤à¤¨à¤¾à¤²à¥à¤œà¥‡à¤¸à¤¿à¤• गà¥à¤£ होते हैं। यही कारण है कि इसे लगाने से घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ में आई सूजन व दरà¥à¤¦ धीरे-धीरे कम होने लगता है । नारियल तेल के जरिठघà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ के दरà¥à¤¦ का उपाय कर सकते हैं। साथ ही जोड़ों के दरà¥à¤¦ का इलाज कर सकते हैं।
12. à¤à¤¸à¥‡à¤‚शियल ऑयल
पà¥à¤¦à¥€à¤¨à¥‡ का तेल
सामगà¥à¤°à¥€ :
पà¥à¤¦à¥€à¤¨à¥‡ के तेल की सात बूंदें
à¤à¤• चमà¥à¤®à¤š नारियल तेल
पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— की विधि :
पà¥à¤¦à¥€à¤¨à¥‡ के तेल को नारियल के तेल में मिला दें।
इन दोनों को अचà¥à¤›à¥€ तरह मिकà¥à¤¸ कर, पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ पर लगाà¤à¤‚।
कितनी बार करें :
दिनà¤à¤° में इसे कितनी à¤à¥€ बार लगा सकते हैं।
कैसे है फायदेमंद :पà¥à¤¦à¥€à¤¨à¥‡ के तेल में मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से मेंथॉल पाया जाता है। मेंथॉल में पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक रूप से à¤à¤‚टी-इंफà¥à¤²à¥‡à¤®à¥‡à¤Ÿà¤°à¥€ गà¥à¤£ होते हैं। इसलिà¤, पà¥à¤¦à¥€à¤¨à¥‡ का तेल घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ में होने वाले दरà¥à¤¦ व सूजन से राहत दिला सकता है । घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ के दरà¥à¤¦ की दवा की जगह पà¥à¤¦à¥€à¤¨à¥‡ के तेल का उपयोग कर सकते हैं।
लोबान का तेल
सामगà¥à¤°à¥€ :
लोबान के तेल की सात बूंदें
à¤à¤• चमà¥à¤®à¤š नारियल तेल
पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— की विधि :
लोबान के तेल और नारियल तेल को आपस में मिकà¥à¤¸ कर लें।
फिर इस मिशà¥à¤°à¤£ को जिस घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ में दरà¥à¤¦ हो रहा हो, वहां लगाà¤à¤‚।
कितनी बार करें :
इस तेल को दिन में कई बार लगा सकते हैं।
कैसे है फायदेमंद :
लोबान के तेल में à¤à¥€ à¤à¤‚टी-इंफà¥à¤²à¥‡à¤®à¥‡à¤Ÿà¤°à¥€ गà¥à¤£ होता है। इस लिहाज से यह घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ के दरà¥à¤¦ में कारगर साबित हो सकता है। वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨à¥‹à¤‚ की मानें, तो लोबान लà¥à¤¯à¥‚कोसाइट इलासà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ (à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार का à¤à¤‚जाइम) को बाधित करके और गà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤•ोसामिनोगà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤•ेनà¥à¤¸ (खराब पॉलीसैकराइड ततà¥à¤µ) को कम करके जोड़ों में दरà¥à¤¦ और सूजन की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ को कम कर सकता है। इसलिà¤, à¤à¤¸à¤¾ कहा जा सकता है कि लोबान का तेल घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ के दरà¥à¤¦ की दवा के रूप में काम कर सकता है।
13. डंडेलियन की पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚
सामगà¥à¤°à¥€ :
डंडेलियन की 10-12 पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚
à¤à¤• कप पानी
थोड़ा-सा शहद
पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— की विधि :
सबसे पहले पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को अचà¥à¤›à¥€ तरह धो लें।
फिर इन पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को सॉस पैन में पानी के साथ डालकर करीब पांच मिनट तक उबालें।
पानी को छानकर ठंड होने के लिठरख दें।
इसके बाद पानी में शहद मिलाकर तà¥à¤°à¤‚त पी जाà¤à¤‚।
कितनी बार करें :
डंडेलियन की पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का यह पानी दिन में à¤à¤•-दो बार पी सकते हैं।
कैसे है फायदेमंद :
घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ के दरà¥à¤¦ का उपचार में डंडेलियन पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ मदद कर सकती हैं, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह à¤à¤‚टी-इंफà¥à¤²à¥‡à¤®à¥‡à¤Ÿà¤°à¥€ का पà¥à¤°à¤®à¥à¤– सà¥à¤°à¥‹à¤¤ हैं। इसे उबाल कर पानी पीने से घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ के दरà¥à¤¦ से आराम मिल सकता है । घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ के दरà¥à¤¦ की दवा के रूप में डंडेलियन की पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ कारगर हो सकती हैं। इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ के दरà¥à¤¦ का आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¿à¤• इलाज माना जाता है।
सामगà¥à¤°à¥€ :
à¤à¤• हॉट पैक
à¤à¤• कोलà¥à¤¡ पैक
पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— की विधि :
दरà¥à¤¦ वाली जगह पर पहले हॉट पैक रखें और फिर उसके बाद कोलà¥à¤¡ पैक रखें।
हर पैक को कम से कम पांच मिनट के लिठरखें।
à¤à¤¸à¤¾ करीब तीन बार करें।
कितनी बार करें :
यह पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ दिन में कई बार कर सकते हैं, ताकि जलà¥à¤¦ आराम आà¤à¥¤
कैसे है फायदेमंद :
हॉट और कोलà¥à¤¡ पैक को à¤à¤• के बाद à¤à¤• पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ जगह पर रखने से दरà¥à¤¦ व सूजन से आराम मिल सकता है। जहां कोलà¥à¤¡ पैक दरà¥à¤¦ वाली जगह को सà¥à¤¨à¥à¤¨ कर देता है, वहीं हॉट पैक घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ में रकà¥à¤¤ के पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹ को बढ़ा देता है। इसे à¤à¥€ घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ के दरà¥à¤¦ का आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¿à¤• इलाज माना जाता है।
15. विटामिनà¥à¤¸
अगर घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ के दरà¥à¤¦ से परेशान हो चà¥à¤•े हैं, तो अपनी डाइट में विटामिन-डी और विटामिन-सी यà¥à¤•à¥à¤¤ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ को शामिल करें। इससे दरà¥à¤¦ से काफी हद तक राहत मिल सकता है। विटामिन-डी से हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ मजबूत होती हैं, जबकि विटामिन-सी से शरीर में कोलेजन का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ होता है । कोलेजन à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार का पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ होता है, जो कारà¥à¤Ÿà¤¿à¤²à¥‡à¤œ में पाया जाता है शरीर में विटामिन की पूरà¥à¤¤à¤¿ के लिठदूध, पनीर, अंडे, सिटà¥à¤°à¤¸ फल, बà¥à¤°à¥‹à¤•ली व हरी पतà¥à¤¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤° सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का सेवन किया जा सकता है।
कई बार घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ के दरà¥à¤¦ की समसà¥à¤¯à¤¾ गंà¤à¥€à¤° हो जाती है और घरेलू नà¥à¤¸à¥à¤–ों से सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में कोई सà¥à¤§à¤¾à¤° नहीं आता। à¤à¤¸à¥‡ में डॉकà¥à¤Ÿà¤° को दिखाना जरूरी है। घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ के दरà¥à¤¦ का इलाज करते समय डॉकà¥à¤Ÿà¤° नीचे लिखी पà¥à¤°à¤•िया अपना सकते हैं
घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ में दरà¥à¤¦ का कारण जानने के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ की जांच कर सकते हैं।
डॉकà¥à¤Ÿà¤° घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ को मोड़ कर इसके लचीलेपन की जांच कर सकते हैं कि घà¥à¤Ÿà¤¨à¤¾ कहां तक मà¥à¥œ रहा है।
अगर डॉकà¥à¤Ÿà¤° को किसी बाहरी चोट का अंदेशा नहीं मिलता, तो वो à¤à¤•à¥à¤¸-रे कराने की सलाह दे सकते हैं।
हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और जोड़ में फà¥à¤°à¥ˆà¤•à¥à¤šà¤° या संकà¥à¤°à¤®à¤£ की जांच के लिठसाधारण à¤à¤•à¥à¤¸-रे या सिटी सà¥à¤•ैन कराना जरूरी होता है।
घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ में दरà¥à¤¦ की समसà¥à¤¯à¤¾ मांसपेशियों में चोट के कारण à¤à¥€ हो सकती है, इसके लिठà¤à¤®à¤†à¤°à¤†à¤ˆ (MRI) जांच होती है, जिसमें लिगामेंट इंजरी को पहचाना जा सकता है।
अगर डॉकà¥à¤Ÿà¤° को किसी संकà¥à¤°à¤®à¤£ गाउट या गठिया के संकेत मिलते हैं, तो वह रकà¥à¤¤ की जांच दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ इसको पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ कर सकता है।
उपरोकà¥à¤¤ जांचों के बाद दरà¥à¤¦ का सही कारण पता चलने पर घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ के दरà¥à¤¦ का इलाज शà¥à¤°à¥‚ किया जाता है।
घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ के दरà¥à¤¦ का इलाज, घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ में दरà¥à¤¦ के कारण पर निरà¥à¤à¤° करता है। à¤à¤• बार कारण मालूम होने पर डॉकà¥à¤Ÿà¤° नीचे लिखे टà¥à¤°à¥€à¤Ÿà¤®à¥‡à¤‚ट शà¥à¤°à¥‚ कर सकते हैं
दवाà¤à¤‚ : घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ के दरà¥à¤¦ के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° दरà¥à¤¦ निवारक व संकà¥à¤°à¤®à¤£ के लिठà¤à¤‚टी बायोटिक जैसी दवाà¤à¤‚ दे सकते हैं। घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ में दरà¥à¤¦ की समसà¥à¤¯à¤¾ अगर किसी पोषक ततà¥à¤µ की कमी के कारण हो, तो उस ततà¥à¤µ की पूरà¥à¤¤à¤¿ के लिठसंबंधित सपà¥à¤²à¥€à¤®à¥‡à¤‚ट à¤à¥€ दिठजा सकते हैं।
थेरेपी : घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ के दरà¥à¤¦ के इलाज के लिठफिजियोथेरेपी कराने की सलाह à¤à¥€ डॉकà¥à¤Ÿà¤° दे सकते हैं। इस थेरेपी का उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ की हडà¥à¤¡à¥€ और मांसपेशियों को मजबूत बनाना हो सकता है।
इंजेकà¥à¤¶à¤¨ : घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ के दरà¥à¤¦ की समसà¥à¤¯à¤¾ से निपटने के लिठदो तरह के इंजेकà¥à¤¶à¤¨ लगाठजा सकते हैं –
कॉरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोसà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‰à¤‡à¤¡ इंजेकà¥à¤¶à¤¨ : घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ के दरà¥à¤¦ से आराम पाने के लिठयह इंजेकà¥à¤¶à¤¨ दिया जा सकता है। यह दरà¥à¤¦ में थोड़े समय के लिठसà¥à¤§à¤¾à¤° कर सकता है। वहीं, इसका असर खतà¥à¤® होने के बाद दोबारा दरà¥à¤¦ शà¥à¤°à¥‚ होने का जोखिम बना रह सकता है
विसà¥à¤•ोसपà¥à¤²à¤¿à¤®à¥‡à¤‚टेशन : इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के अंतरà¥à¤—त घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ में हाइलूरोनन (गाढ़ा तरल पदारà¥à¤¥) का इंटà¥à¤°à¤¾-आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•à¥à¤²à¤° इंजेकà¥à¤¶à¤¨ दिया जाता है। इस इलाज के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ के दरà¥à¤¦ से राहत मिल सकती है।
घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ की सरà¥à¤œà¤°à¥€ : बहà¥à¤¤ गंà¤à¥€à¤° मामलों में डॉकà¥à¤Ÿà¤° सरà¥à¤œà¤°à¥€ की राह सà¥à¤à¤¾à¤¤à¥‡ हैं। घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ के दरà¥à¤¦ से निजात देने के लिठनीचे लिखी सरà¥à¤œà¤°à¥€ अपनाई जाती हैं।
आरà¥à¤¥à¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•ोपिक सरà¥à¤œà¤°à¥€ : यह सरà¥à¤œà¤°à¥€ घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ से कà¥à¤·à¤¤à¤¿à¤—à¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ हिसà¥à¤¸à¥‡ की मरमà¥à¤®à¤¤ करने और घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ के कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤•लाप को सà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¨à¥‡ के लिठकी जाती है। इससे काफी हद तक घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ के दरà¥à¤¦ से राहत मिल सकती है ।
नी रिपà¥à¤²à¥‡à¤¸à¤®à¥‡à¤‚ट (नी आरà¥à¤¥à¥à¤°à¥‹à¤ªà¥à¤²à¤¾à¤¸à¥à¤Ÿà¥€) : ये दो तरीके से किया जा सकता है, à¤à¤• टोटल नी रिपà¥à¤²à¥‡à¤¸à¤®à¥‡à¤‚ट और दूसरा पारà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤² (आंशिक) नी रिपà¥à¤²à¥‡à¤¸à¤®à¥‡à¤‚ट। टोटल नी रिपà¥à¤²à¥‡à¤¸à¤®à¥‡à¤‚ट में घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ के जोड़ की सतह से कà¥à¤·à¤¤à¤¿à¤—à¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ कारà¥à¤Ÿà¤¿à¤²à¥‡à¤œ और हडà¥à¤¡à¥€ को हटा दिया जाता है और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ मेटल या पà¥à¤²à¤¾à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤• की मानव निरà¥à¤®à¤¿à¤¤ सतह के साथ बदल दिया जाता है। वहीं, पारà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤² नी रिपà¥à¤²à¥‡à¤¸à¤®à¥‡à¤‚ट में सरà¥à¤œà¤¨ केवल घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ के जोड़ के à¤à¤• हिसà¥à¤¸à¥‡ को बदलता है ।
1. à¤à¥à¤œà¤‚गासन :
à¤à¥à¤œà¤‚गासन करने के बहà¥à¤¤ से लाठहो सकते हैं, जिसमें से à¤à¤• है घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ के दरà¥à¤¦ से राहत देना। वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• शोध à¤à¥€ इस बात की पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ करते हैं कि à¤à¥à¤œà¤‚गासन का नियमित अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ के दरà¥à¤¦ से राहत दे सकता है
à¤à¥à¤œà¤‚गासन कैसे करें?
à¤à¥à¤œà¤‚गासन को नीचे बताठगठतरीके से किया जा सकता है :
सबसे पहले योग मैट पर पेट के बल लेट जाà¤à¤‚।
दोनों हाथों को सिर के दोनों तरफ रखें और मसà¥à¤¤à¤• को जमीन से लगाà¤à¤‚।
इस दौरान पैरों को तना हà¥à¤† रखें और इनके बीच थोड़ी दूरी रखें।
साथ ही हथेलियों को कंधे के बराबर लाकर रखें।
अब लंबी गहरी सांस à¤à¤°à¤¤à¥‡ हà¥à¤ हाथों से जमीन की ओर दबाव डालते हà¥à¤, नाà¤à¤¿ तक शरीर को ऊपर उठाने की कोशिश करें।
सबसे पहले मसà¥à¤¤à¤•, फिर छाती और आखिर में नाà¤à¤¿ वाले हिसà¥à¤¸à¥‡ को ऊपर उठाà¤à¤‚।
अब आसमान की ओर देखने की कोशिश करें और इस अवसà¥à¤¥à¤¾ में कà¥à¤› देर ठहरें।
शरीर का à¤à¤¾à¤° दोनों हाथों पर बराबर बनाà¤à¤‚ रखें और सामानà¥à¤¯ रूप से सांस लेते रहें।
अब धीरे-धीरे सांस को छोड़ते हà¥à¤ अपनी पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚à¤à¤¿à¤• अवसà¥à¤¥à¤¾ में आ जाà¤à¤‚।
इस तरह आप इस योग का à¤à¤• चकà¥à¤° पूरा करेंगे।
कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾à¤¨à¥à¤¸à¤¾à¤° इस योग के तीन से पांच चकà¥à¤° पूरे किठजा सकते हैं।
2. पशà¥à¤šà¤¿à¤®à¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤¾à¤¨à¤¾à¤¸à¤¨ :
पशà¥à¤šà¤¿à¤®à¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤¾à¤¨à¤¾à¤¸à¤¨ उन आसनों में शामिल है, जो घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ के दरà¥à¤¦ से राहत दे सकते हैं। यह फिजियोथेरेपी के साथ इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जा सकता है और दरà¥à¤¦ से राहत देने में मदद कर सकता है। साथ ही यह घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ की सरà¥à¤œà¤°à¥€ के बाद की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में à¤à¥€ सà¥à¤§à¤¾à¤° कर सकता है, लेकिन ऑपरेशन के बाद इसे अपनाने से पहले डॉकà¥à¤Ÿà¤° से सलाह लेना जरूरी है ।
पशà¥à¤šà¤¿à¤®à¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤¾à¤¨à¤¾à¤¸à¤¨ कैसे करें?
पशà¥à¤šà¤¿à¤®à¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤¾à¤¨à¤¾à¤¸à¤¨ को नीचे बताठगठतरीके से किया जा सकता है :
सबसे पहले जमीन पर योग मैट बिछाà¤à¤‚।
अब पैरों को आगे की ओर फैलाकर बैठजाà¤à¤‚।
इस दौरान दोनों पैर आपस में सटे हों और घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ बिलà¥à¤•à¥à¤² सीधे हों।
इस योग अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ के दौरान सिर, गरà¥à¤¦à¤¨ और रीॠकी हडà¥à¤¡à¥€ को à¤à¥€ सीधा रखें।
अब सांस लेते हà¥à¤ दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाà¤à¤‚।
फिर धीरे-धीरे सांस छोड़ते हà¥à¤ आगे की ओर à¤à¥à¤•ें और माथे को घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ से सटाते हà¥à¤ हाथों से पैरों के अंगà¥à¤ ों को पकड़ने की कोशिश करें।
आगे à¤à¥à¤•ने के दौरान à¤à¥€ घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ नहीं मà¥à¥œà¤¨à¥‡ नहीं चाहिà¤à¥¤
कà¥à¤› सेकंड के लिठइसी अवसà¥à¤¥à¤¾ में बने रहने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करें।
फिर अपनी पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚à¤à¤¿à¤• अवसà¥à¤¥à¤¾ में वापस आ जाà¤à¤‚।
इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को 5 – 6 बार दोहराà¤à¤‚।
मालिश : अरोमाथेरेपी (खà¥à¤¶à¤¬à¥‚दार तेल) की मालिश से घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ के दरà¥à¤¦, सà¥à¤¬à¤¹-सà¥à¤¬à¤¹ होने वाली कठोरता और शारीरिक कामकाज की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में सà¥à¤§à¤¾à¤° लाया जा सकता है। इससे घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ में आई सूजन धीरे-धीरे कम होने लगती है और दरà¥à¤¦ से à¤à¥€ आराम मिल सकता है।
सही मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ : गलत तरीके से उठने-बैठने या फिर चलने-फिरने से à¤à¥€ घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ में दरà¥à¤¦ हो सकता है। इसलिà¤, अपने शरीर की सही मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें।
अधिक आराम : दिनà¤à¤° में जरूरत से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ आराम करने से मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं। इससे घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ व अनà¥à¤¯ जोड़ों में दरà¥à¤¦ शà¥à¤°à¥‚ हो सकता है।
RICE का रखें धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ : घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ या जोड़ों के दरà¥à¤¦ से परेशान लोगों को R-रेसà¥à¤Ÿ, I-आईस, C-कंपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ व E-à¤à¤²à¤¿à¤µà¥‡à¤¶à¤¨ का पालन करने की सलाह दी जाती है। पहले कà¥à¤› देर रेसà¥à¤Ÿ करें, ताकि घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ को आराम मिल सके। फिर उस पर कà¥à¤› देर आईस रखें, ताकि दरà¥à¤¦ व सूजन कम हो। इसके बाद कंपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ बैंडेज घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ पर लपेटें और घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ को थोड़ा ऊपर रखें। यह लिगामेंट चोट को आराम पहà¥à¤‚चा सकता है
à¤à¤•à¥à¤¯à¥‚पंकà¥à¤šà¤° : यह चाइनीज पदà¥à¤§à¤¤à¤¿ कारगर साबित हो सकती है। इसमें शरीर के कà¥à¤› निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ पॉइंटà¥à¤¸ पर सà¥à¤‡à¤¯à¤¾à¤‚ चà¥à¤à¤¾à¤ˆ जाती हैं, जिससे दरà¥à¤¦ से आराम मिल सकता है।
कà¥à¤¯à¤¾ खाà¤à¤‚ : घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ के दरà¥à¤¦ या फिर गठिया रोग से परेशान लोगों के लिठकोई निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ डाइट चारà¥à¤Ÿ नहीं है। फिर à¤à¥€ कà¥à¤› à¤à¤¸à¥‡ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ हैं, जिनके सेवन से दरà¥à¤¦ व सूजन कम हो सकती है। इनके बारे में हम यहां बता रहे हैं
मछलियां : सालà¥à¤®à¤¨ व सारà¥à¤¡à¤¿à¤¨ जैसी मछलियों में ओमेगा-3 फैटी à¤à¤¸à¤¿à¤¡ होता है। ओमेगा-3 फैटी à¤à¤¸à¤¿à¤¡ सूजन को कम कर सकता है। हफà¥à¤¤à¥‡ में दो बार इसका सेवन कर सकते हैं।
जैतून तेल : इसमें à¤à¤‚टीइंफà¥à¤²à¥‡à¤®à¥‡à¤Ÿà¤°à¥€ गà¥à¤£ पाया जाता है, जो सूजन और दरà¥à¤¦ से राहत देने में मदद कर सकता है ।
डेयरी उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦ : हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के लिठविटामिन-डी जरूरी है और दूध, दही व पनीर इसके पà¥à¤°à¤®à¥à¤– सà¥à¤°à¥‹à¤¤ हैं।
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